June 2011

 Snan Yatra !! यह बात और है कि मुक्ति का स्वरूप प्रत्येक के मत में भिन्न भिन्न होता है. मुक्ति के स्वरूप के बारे में इतनी वैचारिक भिन्नता उन-उन विचारकों के मत में दुःख या बन्धन का स्वरूप क्या है इस पर निर्भर करती है. जीवात्मा की कैसी अवस्था को, किन विषयों को, किन...

May 2011

Nrusimha Chaudas !! धर्माचरण के द्वारा हम जीवन के किसी अलौकिक उदेश्य की सिद्धि चाहते हैं. इसी तरह अर्थोपाजन के द्वारा हम अपने काम पुरुषार्थ की सिद्धि चाहते हैं. कोई काम पुरुषार्थ की सिद्धि क्यों चाहता है? प्रश्न का उत्तर दे पाना कठिन कार्य है. क्योंकि अधिकाधिक इतना भर...

March 2011

SUPERSOUL’S BEING, CONSCIOUSNESS AND BLISSFULNESS The nature of the super soul is said to be being consciousness and blissfulness. The nature of truth or existence can be grasped, it is effected by chit or consciousness. Between the intrinsic nature and outward effect...

April 2011

Every school of thought has its own interpretation into the nature of liberation, they all put great emphasis on the nature of pain and bondage and how to0 be liberated from them. They are also concerned with the nature of the soul, its subject, relations, needs and...