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सेयं भगवतो माया... ........  भागवतपुराण (3।7।9-10 )  

सेवकानां यथा लोके व्यवहारः प्रसिद्ध्यति ........  सिद्धान्तरहस्य (8-9 )  

सेवायां वा कथायां वा ........  भक्तिवर्धिनी (9 )  

सेवायां विशेषम् आह... ........  भागवत सुबोधिनी (10।87।27 )  

सैषा अविद्या जगत् सर्वम् ... ........  नृसिंहोत्तरतापनीयोपनिषद् (9 )  

सैषा आनन्दस्य मीमांसा भवति... ........  तैत्तिरीयोपनिषद् (2।8 )  

सैषा वटबीज...माया चाविद्या चस्वयमेव भवति ........  नृसिंहोत्तरतापनीयोपनिषद् (9 )  

सैषा वेदोपनिषद् ........  तैत्तिरीयोपनिषद् (1।11।4 )  

सो अकामयत बहु स्यां ...अकुरुत... ........  तैत्तिरीयोपनिषद् (2।6-7 )  

सो अनुवीक्ष्य न अन्यद् आत्मनो अपश्यद्... ........  बृहदारण्यकोपनिषद् (4।4।1 )  

सोम औषधीनाम् ........  तैत्तिरीयसंहिता (3।4।5।12 )  

सोमं यजति ........  तैत्तिरीयसंहिता (2।6।10।5 )  

सोऽकामयत...स तपोऽतप्यत ........  तैत्तिरीयोपनिषद् (3।2।6 )  

सोऽहं तव अंघ्र्युपगतो अस्मि असतां दुरापं ........  भागवतपुराण (10।37।28 )  

सोऽहं भगवते विदेहान् ददामि... ........  बृहदारण्यकोपनिषद् (4।4।23 )  

सोऽहं ममाहं... ........  भागवतपुराण (11।7।16 )  

सौरीभ्यामृग्भ्यां गार्हपत्ये ........  तैत्तिरीयसंहिता (6।6।1।1 )  

स्तुतस्य स्तुतमसि शस्त्रस्य ........  तैत्तिरीयसंहिता (3।2।7।1-2 )  

स्त्रिभ्यो ढक्... ........  पाणिनिसूत्र (4।1।120 )  

स्त्रीणाम् अनुपनीतानां... ........  बृहन्नारदीयपुराण (। । )  

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