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विरचिताभयं वृष्णिधुर्य ते ........  भागवतपुराण (10।28।5 )  

विरुद्धधर्माश्रयत्वात् च भगवति... ........  भागवत सुबोधिनी (1।19।16 )  

विरुद्धसर्वधर्माणाम् आश्रयम्... ........  तत्त्वार्थदीपनिबन्ध (1।71 )  

विरुद्धैः अविरुद्धैः वा भावैः... ........  दशरूपक (4।34 )  

विरोधेतु अनपेक्षं स्यात् ........  जैमिनिसूत्र (1।3।3 )  

विरोधेतु अनपेक्षं स्याद् ... ........  जैमिनिसूत्र (1।3।3 )  

विलज्जमानया यस्य स्थातुम् ... ........  भागवतपुराण (2।5।13 )  

विवर्तवादस्य हि पूर्वभूमिः...विवर्तवादः... ........  संक्षेपशारीरक (2।61 )  

विवाहस्तु समन्त्रकः... ........  याज्ञवल्क्यस्मृति (2।13 )  

विविक्तदेशे च सुखासनस्थः ........  कैवल्योपनिषद् (5 )  

विशेषस्तु विकुर्वाणाद् ........  भागवतपुराण (2।5।29 )  

विशो वै मरुतः... ........  शतपथब्राह्मण (3।9।1।14-17 )  

विश्लिष्टशक्तिः बहुधेव भाति ........  भागवतपुराण (11।12।20 )  

विश्वं वै ब्रह्म तन्मात्रम् ........  भागवतपुराण (3।10।12 )  

विश्वजिता यजेत ........  शतपथब्राह्मण (10।2।1।16 )  

विश्वमात्मगतं व्यञ्जन् ........  भागवतपुराण (3।26।22 )  

विश्वामित्रः ऋषिः सुदासः... ........  निरुक्तनिघण्टु (2।7।24 )  

विश्वामित्रपुत्रस्तु... ........  विष्णुपुराण (4।7।37-39 )  

विश्वामित्रेण ताः प्रोक्ताः... ........  शौनकीयबृहद्देवतायां (4।118 )  

विश्वामित्रोऽपि धर्मात्मा ........  वाल्मिकीरामायण बालकाण्ड (65।26 )  

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