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भगवान् ब्रह्म कात्स्नर्येन ........  भागवतपुराण (2।2।34 )  

भगवान् ब्रह्म कात्स्नर्येन... ........  भागवतपुराण (2।2।24 )  

भगवान् भजतां मुकुन्दो ........  भागवतपुराण (5।6।18 )  

भगवान् यः...स्वयमेव... ........  भागवतश्रीधर्यां (2।6।38 )  

भगवान् सच्चिदानन्दरूपो...तिरोभवति... ........  भागवत सुबोधिनी (2।9।1 )  

भगो वां विभजतु... ........  मानवश्रौतसूत्र (1।2।3।17 )  

भजने प्रमाणाभावम् आह... ........  भागवत सुबोधिनी (3।29।22 )  

भर्ता सन् भ्रियमाणो बिभर्ति ........  तैत्तिरीयारण्यक (3।14।1 )  

भर्तुः शरीरशुश्रूषा... ........  मनुस्मृति (9।86-87 )  

भस्मन्येव जुहोति स... ........  भागवतपुराण (3।29।22 )  

भस्मोद्धूलितदेहस्तु... ........  गरुडपुराण (2।12 )  

भागगुणाभ्यां तत्वान्तरं वृत्तिः ........  सांख्यप्रवचनसूत्र (5।107 )  

भागवतज्ञानमपि त्रैवर्णिकानामेव... ........  तत्त्वार्थदीपनिबन्ध प्रकाश (3।24।178 )  

भारतव्यपदेशेन... ........  भागवतपुराण (1।4।28 )  

भावनं ब्रह्मणः स्थानम् ........  भागवतपुराण (3।26।46 )  

भावनाजं मलं यत् स्यात्... ........  बृहदारण्यकोपनिषच्छांकरभाष्यवार्तिक (7।7।7 )  

भिद्येते...नामरूपे पुरुष इति एवं प्रोच्यते... ........  प्रश्नोपनिषद् (6।5 )  

भुवि भक्तिप्रचारैककृते स्वान्वयकृद ........  सर्वोत्तमस्तोत्र (22 )  

भूः अग्नये पृथिव्यै स्वाहा... ........  महानारायणोपनिषद् (6।1 )  

भूच्छायादर्शंनं लोके तमोदर्शन...मण्डनः... ........  मानमेयरहस्यश्लोकवार्तिक (21 )  

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